दिवाली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला नरक चतुर्दशी का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इसे छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। साल 2026 में नरक चतुर्दशी का त्योहार आज यानी 7 नवंबर, शनिवार को मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा, अभ्यंग स्नान और दीपदान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली पर कुछ ऐसे काम हैं, जिन्हें करने से बचना चाहिए। माना जाता है कि इन गलतियों का असर घर की सुख-समृद्धि और शांति पर पड़ सकता है। आइए जानते हैं नरक चतुर्दशी के दिन किन 5 बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
1. सुबह देर तक सोने से बचें
नरक चतुर्दशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। इसे अभ्यंग स्नान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इसलिए छोटी दिवाली पर देर तक सोने से बचना चाहिए। स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर भगवान का ध्यान और पूजा करनी चाहिए।
2. घर में गंदगी और कूड़ा जमा न होने दें
दीपावली के त्योहार में साफ-सफाई को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। नरक चतुर्दशी पर भी घर के हर कोने, मुख्य दरवाजे और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, स्वच्छ और व्यवस्थित घर में मां लक्ष्मी का वास होता है। इसलिए घर में कूड़ा-कचरा या बेकार सामान जमा करके रखने से बचें।
3. किसी का अपमान करने या विवाद करने से बचें
छोटी दिवाली का दिन केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि अच्छे व्यवहार और सकारात्मकता का संदेश भी देता है। इस दिन किसी से झगड़ा करना, अपशब्द बोलना या दूसरों का अपमान करना शुभ नहीं माना जाता। कोशिश करनी चाहिए कि परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों के साथ प्रेम और सद्भाव बनाए रखें। मन में किसी के प्रति नकारात्मक भावना रखने से भी बचना चाहिए।
4. शाम को यमराज के नाम का दीपक जलाना न भूलें
नरक चतुर्दशी पर दीपदान की विशेष परंपरा है। इस दिन शाम के समय यमराज के नाम से दीपक जलाया जाता है, जिसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि यमराज के निमित्त दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। इसलिए छोटी दिवाली की शाम घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाने की परंपरा निभाई जाती है।
5. घर में अंधेरा न रहने दें
नरक चतुर्दशी को रोशनी और सकारात्मकता का पर्व माना जाता है। इस दिन घर को दीपकों और रोशनी से सजाने की परंपरा है। खासतौर पर मुख्य दरवाजे और पूजा स्थल के आसपास पर्याप्त रोशनी रखनी चाहिए। शाम के समय दीपक जलाकर घर को रोशन करना शुभ माना जाता है।
क्यों मनाई जाती है नरक चतुर्दशी?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था। कहा जाता है कि नरकासुर ने हजारों कन्याओं को बंदी बना रखा था। भगवान श्रीकृष्ण ने उसका अंत करके उन्हें मुक्त कराया था। इसी विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है।
इस दिन अभ्यंग स्नान, भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और दीपदान का विशेष महत्व है। छोटी दिवाली का पर्व जीवन में स्वच्छता, सकारात्मकता और खुशहाली का संदेश देता है।


