नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की गहरी लापरवाही का नतीजा थी। हालिया सुनवाई में, गौतमबुद्धनगर जिला अदालत ने इस केस में पुलिस और प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है, जिससे अब न्याय की उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।
युवराज मेहता की कार जिस गहरे और पानी से भरे गड्ढे में डूबी थी, उस मामले में कोर्ट ने सीधे नोएडा प्राधिकरण की भूमिका पर बड़ा सवाल उठाया है। कोर्ट ने जांच अधिकारियों से स्पष्ट पूछा कि जब इस गड्ढे की जिम्मेदारी नोएडा प्राधिकरण की थी, तो उसे आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। कोर्ट के इस एक सवाल ने पूरे प्रशासनिक सिस्टम की बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया है।
सुनवाई के दौरान, आरोपी बिल्डरों की ओर से भी गंभीर आरोप लगाए गए। बिल्डरों ने कोर्ट को बताया कि जिस प्लॉट में यह हादसा हुआ, उस गड्ढे में साल 2021 से लगातार पानी भरा हुआ था। इसे ठीक कराने के लिए फंड भी पास हो चुका था, लेकिन नोएडा प्राधिकरण ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। लापरवाही की हद तब और बढ़ गई जब कोर्ट ने जांच अधिकारी से बिल्डर द्वारा जमा की गई 500 पन्नों की रिपोर्ट के बारे में पूछा। जांच अधिकारी ने हैरान करने वाला जवाब दिया कि उन्होंने रिपोर्ट अभी तक पढ़ी ही नहीं है। इस पर कोर्ट ने सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे बड़ी लापरवाही माना।
16 जनवरी की रात हुई यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था की नाकामी का जीता-जागता उदाहरण है। बेसमेंट के लिए खोदे गए प्लॉट में पानी भरा था, जहां युवराज की कार गिर गई। कार के अंदर फंसे होने के बावजूद, बाहर मौजूद पुलिस, फायर ब्रिगेड और SDRF के करीब 80 जवानों की टीम समय पर उन्हें बचाने में नाकाम रही। यहां तक कि एक रेस्क्यू कर्मी पानी की ठंड और लोहे की सरियों के डर से तुरंत बाहर आ गया था। अंततः, एक डिलीवरी बॉय, मुनेंद्र सिंह, ने हिम्मत दिखाई, लेकिन तब तक युवराज की जान जा चुकी थी। इस पूरे मामले में दो घंटे से अधिक समय तक कोई बड़ा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिसने हाईटेक गौतमबुद्धनगर की पोल खोल दी।
कोर्ट ने पुलिस और प्रशासन दोनों की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाया है। अब यह मामला सिर्फ एक युवक की मौत का नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही का सवाल बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि क्या लापरवाह अधिकारियों पर भी कार्रवाई होती है, या युवराज मेहता को इंसाफ सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सिमट कर रह जाएगा।









