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प्रयागराज माघ मेला विवाद: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने क्यों छोड़ा मेला? सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज माघ मेला छोड़ने का किया ऐलान
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रयागराज माघ मेला छोड़ने का किया ऐलान

धार्मिक नगरी प्रयागराज में चल रहे माघ मेले से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रमुख धर्मगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने विवादों के बीच अचानक मेला छोड़ने का ऐलान कर दिया है। शंकराचार्य का यह कदम संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच गहरी चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने काशी के लिए प्रस्थान करते हुए मौजूदा परिस्थितियों पर गहरा दुख व्यक्त किया और सीधे तौर पर सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं।

माघ मेला छोड़ने के अपने फैसले पर बोलते हुए, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इसे ‘अत्यंत दुखद और अकल्पनीय’ क्षण बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस पवित्र धरती से बिना स्नान किए ही वापस लौटना पड़ रहा है। शंकराचार्य ने दुख जताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति की उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। उन्होंने बताया कि यह फैसला रातों-रात नहीं लिया गया, बल्कि 11 दिनों के लंबे इंतजार के बाद लिया गया। उन्होंने कहा कि इतना लंबा समय तो भगवान श्रीराम ने भी समुद्र से रास्ता मांगते समय नहीं लिया था। शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि माघ मेले में स्नान करना उनके लिए केवल एक धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि आस्था का विषय था, बावजूद इसके उन्हें यह कठिन निर्णय लेना पड़ा है।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मेले में संतों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार को लेकर प्रशासन और सरकार की आलोचना की। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जो मुगलों के समय में होता था, वही आज हो रहा है। उन्होंने गृहमंत्री के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि संतों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और फिर माघ मेले में संतों को उनकी चोटी और शिखा पकड़कर घसीटा गया और पीटा गया। उन्होंने कहा कि आज यहां जो अपमान हुआ है, वह सरकार का दोहरा चरित्र उजागर करता है।

इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए, शंकराचार्य ने दो मिनट का मौन भी रखा और भगवान से प्रार्थना की कि संतों का अपमान करने वालों को दंड मिले। उन्होंने सीधे तौर पर यूपी सरकार को निशाना बनाते हुए कहा कि संगम तट पर उनकी ‘भौतिक हत्या का प्रयास’ किया गया। शंकराचार्य ने कहा, “इन दिनों हमारी पीठ की हत्या का प्रयास हुआ, और वे सफल रहे। यह हत्या अगर यहां का स्थानीय प्रशासन कर रहा होता तो ठीक है, लेकिन इसके पीछे यूपी की सरकार का हाथ है।”

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के इस अचानक प्रस्थान और यूपी सरकार पर लगाए गए इन गंभीर आरोपों ने पूरे संत समाज में रोष पैदा कर दिया है। अब देखना यह है कि प्रयागराज प्रशासन और उत्तर प्रदेश की सरकार इस संवेदनशील मामले पर क्या कदम उठाती है।

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