भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। हालांकि, तेजी के इस माहौल के बीच बुधवार का शुरुआती कारोबार मिला-जुला रहा। विदेशी निधियों के नए प्रवाह और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की सकारात्मक खबरों ने बाजार को शुरुआती बढ़त दिलाई, लेकिन प्रमुख आईटी कंपनियों में आई भारी बिकवाली ने सूचकांकों की रफ्तार को सीमित कर दिया।
पिछले कारोबारी दिन मंगलवार को 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 4,205.27 अंक की जबरदस्त बढ़त दर्ज करते हुए अपने उच्चतम स्तर 85,871.73 पर बंद हुआ था, जबकि एनएसई निफ्टी भी 639.15 अंक बढ़कर 25,727.55 पर बंद हुआ था। बुधवार को भी शुरुआती कारोबार में यह तेजी कायम रही। बीएसई सेंसेक्स 68.49 अंक बढ़कर 83,816.96 पर कारोबार कर रहा था, वहीं एनएसई निफ्टी 51.90 अंक की बढ़त के साथ 25,779.45 पर पहुंच गया। इस बीच, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में 22 पैसे की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार की तेजी पर लगा ब्रेक
बाजार में आई इस तेजी को सबसे बड़ी चुनौती आईटी (Information Technology) सेक्टर से मिली। शुरुआती कारोबार में ही आईटी शेयरों में तेज बिकवाली शुरू हो गई, जिसने इंडेक्स की बढ़त को सीमित कर दिया। बिकवाली के चलते बीएसई आईटी इंडेक्स 4.95 प्रतिशत गिरकर 35,311.34 पर आ गया।
प्रमुख लूजर: इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा सबसे ज्यादा पिछड़ने वाले शेयरों में शामिल रहे। इन कंपनियों में 5 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
प्रमुख गेनर: सेंसेक्स सूची में शामिल कंपनियों में महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M), पावर ग्रिड, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक और आईटीसी सबसे बड़े लाभ कमाने वालों में से थे, जिन्होंने बाजार को संभाले रखा।
बाजार में यह उतार-चढ़ाव दिखाता है कि जहां एक ओर मजबूत आर्थिक और व्यापारिक खबरें बड़े शेयरों को सहारा दे रही हैं, वहीं खास सेक्टरों में बिकवाली का दबाव बना हुआ है। निवेशकों को आगे की रणनीति तय करते समय इन मिश्रित संकेतों पर ध्यान देना आवश्यक है।









