Loading...
  • ... अपडेट हो रहा है
  • ... अपडेट हो रहा है
  • ... अपडेट हो रहा है
24K Gold
Loading...
Silver (1kg)
Loading...
24K Gold
Loading...
ताज़ा ख़बरें
Loading updates...

होम

शॉर्ट अपडेट

ब्रेकिंग

लाइव टीवी

मेन्यू

पश्चिम बंगाल 2026 चुनाव: मुस्लिम मतदाता क्यों बनेंगे 120 सीटों पर नतीजों का निर्णायक चेहरा?

पश्चिम बंगाल 2026 चुनाव

पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 विधानसभा चुनाव की बिसात बिछनी शुरू हो गई है। राज्य की कुल आबादी में 27 से 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखने वाला मुस्लिम समुदाय इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएगा। राज्य की मुख्य पार्टियां, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP), इसी बड़े वोट बैंक को साधने के लिए अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे रही हैं। मुस्लिम वोटर्स का रुख इस बार कई अहम सामाजिक-आर्थिक और पहचान संबंधी मुद्दों पर निर्भर करेगा।

पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में, लगभग 80 से 120 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाता सीधे तौर पर चुनाव परिणाम निर्धारित करते हैं। कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में तो मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी 45-50 प्रतिशत से भी अधिक है। इसके अलावा, राज्य की करीब 174 सीटों पर कम से कम 15 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं, जो इन्हें महत्वपूर्ण बनाते हैं।

पारंपरिक रूप से, ममता बनर्जी की टीएमसी को इस समुदाय का जबरदस्त समर्थन मिलता रहा है। अक्सर 80-90 प्रतिशत से अधिक वोट टीएमसी के खाते में जाते हैं। ममता बनर्जी गरीबी उन्मूलन, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला कल्याण योजनाओं पर ज़ोर देती हैं, जिसके दम पर उनकी पकड़ इस समुदाय में मजबूत बनी हुई है।

भाजपा इस महत्वपूर्ण वोट बैंक को तोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि मुस्लिम बहुल सीटों पर उसकी जीत मुश्किल है, भाजपा हिंदू वोटर्स को एकजुट करने और ‘घुसपैठ’ के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित कर रही है। हालिया लोकसभा चुनावों में भाजपा ने मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में अपना वोट शेयर बढ़ाया है, लेकिन सीटों में जीत हासिल करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

मौजूदा समय में, ‘वोटर लिस्ट स्पेशल रिवीजन (SIR) 2025’ एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। टीएमसी और मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा वोटर लिस्ट अपडेट करने की इस प्रक्रिया के तहत, मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में जानबूझकर मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, जिसे वे मुस्लिम वोटर्स को हटाने की साजिश बताते हैं। वहीं, भाजपा स्पष्ट रूप से कहती है कि यह प्रक्रिया बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें हटाने के लिए आवश्यक है। हालांकि कुछ अध्ययनों में अच्छी मैपिंग दिखी है, लेकिन विवाद अभी भी जारी है।

2026 के चुनावों में एक और महत्वपूर्ण कारक मुस्लिम वोट का संभावित बंटवारा है। एआईएमआईएम (AIMIM) जैसी स्थानीय और राष्ट्रीय पार्टियां सभी सीटों पर लड़ने का दावा कर रही हैं। इसके अलावा, टीएमसी से निलंबित कुछ स्थानीय नेता जैसे हुमायूँ कबीर ने भी नई पार्टियाँ बनाई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मुस्लिम वोट बंटता है, तो इसका सीधा नुकसान टीएमसी को होगा और भाजपा को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिल सकता है।

2026 के विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल के मुस्लिम मतदाताओं का रुख न केवल उनकी संख्या के कारण, बल्कि रोजगार, शिक्षा, सुरक्षा और पहचान जैसे सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर भी निर्भर करेगा, जो पूरे राज्य के चुनावी नतीजों की दिशा तय करेगा।

संबंधित खबरें

रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कहा है कि आने वाले समय में भारतीय रेलवे की

कल यानि 05/11/2026 को CBSE जल्द ही Class 12 Board Result 2026 जारी कर सकता

Gold की कीमतों में सोमवार को गिरावट देखने को मिली। इसकी बड़ी वजह US और

AI की वजह से नौकरी जाने का डर अब सिर्फ चर्चा नहीं रहा, बल्कि इस

दिल्ली पुलिस की Crime Branch ने नकली मोबाइल प्रोडक्ट बनाने वाले बड़े रैकेट का खुलासा

दिल्ली में खेल प्रेमियों के लिए एक खास मौका आने वाला है। आगामी 7 मई

2026 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी का प्रदर्शन हर जगह एक जैसा नहीं है। कुछ

MI ने IPL 2026 में अपनी टीम में कुछ बदलाव किया है। टीम ने केशव

भारत में खेल संस्कृति को लेकर एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। डबल स्वर्ण

CBSE 12वीं रिजल्ट 2026: छात्रों का इंतजार जल्द होगा खत्म CBSE यानी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा

मशहूर अभिनेता अन्नू कपूर ने दिवंगत अभिनेता ओम पुरी के बारे में एक बड़ा खुलासा