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रूस में भारतीय श्रमिकों की बहार: वर्कफोर्स डील से युवाओं के लिए खुले 80,000 से ज्यादा नौकरी के अवसर

रूस में भारतीय श्रमिकों की बहार
रूस में भारतीय श्रमिकों की बहार

रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण रूस इस समय बड़े संकट का सामना कर रहा है: मजदूरों की भारी कमी। पश्चिमी देशों के सख्त प्रतिबंधों और युद्ध की वजह से फैक्टरियों और निर्माण स्थलों पर काम करने वालों की संख्या लगातार घट रही है। इस बड़े गैप को भरने के लिए रूस ने अब अपने सबसे भरोसेमंद दोस्त भारत की ओर रुख किया है। भारत और रूस के बीच हुई एक महत्वपूर्ण वर्कफोर्स डील के तहत, हजारों भारतीय कुशल कामगार रूस जाकर वहां की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर रहे हैं, जिससे भारतीय युवाओं के लिए रोजगार के नए दरवाजे खुल गए हैं।

रूस में यह संकट इतना गहरा है कि फैक्ट्रियों, निर्माण स्थलों और औद्योगिक परियोजनाओं में काम करने के लिए लोग नहीं मिल पा रहे हैं। इसका सीधा असर रूस की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

1. रूसी दूतावास द्वारा हाल ही में जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस वक्त रूस में 70,000 से अधिक भारतीय काम कर रहे हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है।

2. रूस के वरिष्ठ अधिकारियों के आकलन के मुताबिक, यह आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय दूतावास की तरफ से बताया गया है कि 2025 के अंत तक यह आंकड़ा 80,000 के पार पहुंचने की संभावना है। वहीं, 2026 तक करीब 40 हजार और भारतीय कामगारों को रूस में रोजगार मिलने की उम्मीद है।

इस बड़ी पहल की नींव दिसंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई एक अहम बैठक में रखी गई थी। इसी बैठक में दोनों नेताओं ने तय किया था कि भारत के कुशल कामगार रूस की कमी को पूरा करेंगे। इस समझौते के बाद रूस ने भारतीयों के लिए हजारों नौकरियों का कोटा तय किया। जर्मनी की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रूस जाने वाले भारतीयों की संख्या हर तीन महीने में तेजी से बढ़ रही है। इस पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए भारत और रूस की सरकारी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं, ताकि किसी भी भारतीय को नौकरी के नाम पर धोखा न मिले।

यह वर्क डील भारत-रूस की दोस्ती को एक नई मजबूती दे रही है। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक दबाव के बावजूद भारत ने अपने व्यापारिक रुख को नहीं बदला है। अमेरिका के दावों के बावजूद, भारत ने साफ कहा है कि वह अपने राष्ट्रीय फायदे को देखकर ही व्यापार करेगा और किसी बाहरी दबाव में नहीं आएगा। भारत और रूस की दोस्ती एक बार फिर मजबूत होती नजर आ रही है, और कामगारों को लेकर हुआ यह समझौता इसका ताजा उदाहरण है।

यह समझौता रूस को जरूरी कार्यबल प्रदान कर रहा है, वहीं भारत के लाखों युवाओं के लिए विदेश में सुरक्षित और अच्छी नौकरियों का रास्ता खोल रहा है, जिससे दोनों देशों को बड़ा आर्थिक लाभ होगा और द्विपक्षीय संबंध और गहरे होंगे।

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