सोशल मीडिया पर AI कंटेंट लेबलिंग अनिवार्य: सरकार ने जारी किए नए IT नियम, डीपफेक वीडियो 3 घंटे में हटाने होंगे

सोशल मीडिया पर AI कंटेंट लेबलिंग अनिवार्य
सोशल मीडिया पर AI कंटेंट लेबलिंग अनिवार्य

अगर आप X (ट्विटर), फेसबुक या यू-ट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बने कंटेंट और डीपफेक पर लगाम लगाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी किए गए इन नए आदेशों के तहत, सभी प्लेटफॉर्म्स को AI कंटेंट पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने हाल ही में IT नियम 2021 में संशोधन के आदेश जारी किए हैं, जो 20 फरवरी से लागू हो रहे हैं। इन नियमों का मुख्य फोकस ऑनलाइन मिसइनफॉर्मेशन, चुनावी धांधली और धोखाधड़ी वाले AI कंटेंट को पहचानना और उसे तत्काल हटाना है।

AI कंटेंट की लेबलिंग और ट्रेसिंग अनिवार्य:

नए रूल 3(3) के तहत, जो भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म AI कंटेंट जैसी ‘सिंथेटिकली जेनरेटेड इंफॉर्मेशन’ को क्रिएट करने या शेयर करने देगा, उसे कड़े नियम मानने होंगे:

स्पष्ट लेबलिंग: हर AI कंटेंट पर एक प्रमुख (Prominent) लेबल लगाना होगा, जो यह बताएगा कि यह कंटेंट असली नहीं, बल्कि AI द्वारा बनाया गया है।

मेटाडेटा एम्बेडिंग: कंटेंट में परमानेंट यूनिक मेटाडेटा या आइडेंटिफायर एम्बेड करना अनिवार्य होगा, जिसे कोई भी यूजर या कंपनी बदल, छिपा या डिलीट नहीं कर सकेगी।

कवरेज का नियम: विजुअल कंटेंट में यह लेबल कम से कम 10% एरिया को कवर करेगा, जबकि ऑडियो में यह पहले 10% समय में सुनाई देना चाहिए।

तकनीकी जांच: प्लेटफॉर्म्स को ऐसी तकनीकी विधियां अपनानी होंगी ताकि अपलोड होने से पहले ही चेक हो जाए कि कंटेंट AI द्वारा जनरेटेड है या नहीं।

डीपफेक पर तत्काल कार्रवाई और यूजर वॉर्निंग:

नए नियमों के तहत, सोशल मीडिया कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ा दी गई है। अब उन्हें ये कदम उठाने होंगे:

1. 3 घंटे में डीपफेक हटाना: कंपनियों को आपत्तिजनक, भ्रामक, अश्लील या डीपफेक कंटेंट की शिकायत मिलने पर उसे अधिकतम 3 घंटे के भीतर हटाना होगा।

2. ऑटोमेटेड टूल का उपयोग: कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे ऐसे ऑटोमेटेड टूल्स (सॉफ्टवेयर) का इस्तेमाल करें जो AI के माध्यम से बनाए गए गैर-कानूनी या धोखाधड़ी वाले कंटेंट को स्वयं ही रोक सकें।

3. त्रैमासिक चेतावनी: कंपनियों को हर तीन महीने में कम से कम एक बार अपने यूजर्स को वॉर्निंग देनी होगी। इसमें बताना होगा कि नियमों का उल्लंघन करने या AI का गलत इस्तेमाल करने पर कानूनी सजा या जुर्माना लग सकता है।

सरकार का यह कड़ा कदम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते दुरुपयोग को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। 20 फरवरी से लागू होने वाले ये नियम भारतीय इंटरनेट इकोसिस्टम को और अधिक सुरक्षित बनाएंगे।

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