भारत भाग्य विधाता शो का प्रोमो बैनर, जिसमें शो के एंकर Vivek Pathak की तस्वीर दिखाई गई है। इसका प्रसारण सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे Bharat Update पर होता है।

50 रुपये से 1.5 लाख का सफर: क्यों आसमान छू रही है सोने-चांदी की कीमत?

50 रुपये से 1.5 लाख का सफर
50 रुपये से 1.5 लाख का सफर

आपने अपनी दादी-नानी से सुना होगा कि एक समय था जब सोना सिर्फ 50 रुपये प्रति तोला मिलता था। लेकिन आज उसी सोने की कीमत लाखों में है। चांदी, जो कभी सिर्फ बर्तनों और पायल तक सीमित थी, आज निवेश का बड़ा हथियार बन चुकी है। सवाल यह है कि आखिर पिछले कुछ दशकों में ऐसा क्या बदल गया कि सोना-चांदी आम आदमी की पहुँच से दूर होते जा रहे हैं? आइए समझते हैं इस 50 रुपये के सोने के 1.5 लाख तक पहुंचने का पूरा गणित।

1. गहना से निवेश तक का सफर

अगर हम 30-40 साल पीछे जाएँ, तो सोना सिर्फ शादी-ब्याह या त्योहारों पर पहनने वाले गहनों के तौर पर इस्तेमाल होता था। उस दौर में पैसे की ताकत ज्यादा थी, और महंगाई कम। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, रुपये की क्रय शक्ति घटती गई। लोगों को यह महसूस होने लगा कि बैंक में रखा उनका पैसा महंगाई के चलते कमजोर हो रहा है, जबकि दूसरी ओर सोना अपनी कीमत लगातार बनाए हुए है। इसी सोच ने सोने को सिर्फ गहना नहीं, बल्कि बचत और सुरक्षित निवेश (Safe Heaven Asset) का एक अनिवार्य हिस्सा बना दिया।

2. वैश्विक तनाव, बैंक और तकनीकी मांग

सोने की कीमतों में तेजी का दूसरा बड़ा कारण वैश्विक उथल-पुथल है। जब भी दुनिया में कोई बड़ा तनाव (जैसे युद्ध, महामारी, या आर्थिक मंदी) पैदा होता है, निवेशक शेयर बाजार और बिज़नेस से पैसा निकालकर सीधे सोने में निवेश करते हैं क्योंकि यह भरोसेमंद और जोखिम-मुक्त माना जाता है। इसके अलावा, दुनिया भर के बड़े-बड़े केंद्रीय बैंक भी अब बड़ी मात्रा में सोना जमा कर रहे हैं। जब सरकारें और केंद्रीय बैंक खुद ही सोना खरीदने लगें, तो मांग बढ़ने से कीमतें बढ़ना स्वाभाविक है।

चांदी के मामले में, मांग अब औद्योगिक हो गई है। पहले यह सिर्फ गहनों तक सीमित थी, लेकिन आज मोबाइल, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक कार और मशीनों जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में चांदी का व्यापक इस्तेमाल होता है। मांग में यह वृद्धि सीधे-सीधे उसकी कीमत बढ़ा रही है। ऊपर से डॉलर का खेल भी अहम है; चूंकि सोने का व्यापार डॉलर में होता है, जब भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो भारत में सोने की कीमत स्वत: ही बढ़ जाती है।

3. कीमतों में उतार-चढ़ाव क्यों आते हैं?

अगर सोना इतना ही भरोसेमंद है, तो इसके दाम गिरते क्यों हैं? यह गिरावट ‘करेक्शन’ (Correction) कहलाती है। जब कीमतें बहुत तेज़ी से बढ़ जाती हैं, तो निवेशक मुनाफा कमाने के लिए सोना बेचना शुरू कर देते हैं। बाजार में सोने की अधिक सप्लाई होने पर दाम अस्थायी तौर पर गिर जाते हैं। गिरावट का दूसरा कारण यह है कि जब बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर ज्यादा ब्याज देने लगते हैं, तो कुछ निवेशक अपना पैसा सोने से निकालकर अधिक रिटर्न वाली एफडी की तरफ चले जाते हैं।

सच्चाई यह है कि जब तक दुनिया में तनाव रहेगा, महंगाई बढ़ेगी और टेक्नोलॉजी का विकास होगा, तब तक सोना और चांदी की अहमियत बनी रहेगी। बीच-बीच में गिरावट ज़रूर आएगी, लेकिन लंबी अवधि के निवेश के लिए ये आज भी हमारी मेहनत की सुरक्षा और भविष्य की ताकत हैं। इसलिए हमेशा सोच-समझकर और अपने जोखिम के अनुसार निवेश करें।

संबंधित खबरें

लाल किले पर साइकिल तिरंगा यात्रा का समापन, 125 साइकिल सवारों ने लिया हिस्सा

काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी, विश्व शांति के लिए की प्रार्थना

करण जौहर का अतरंगी लुक वायरल, यूजर्स बोले- ‘कौवे जैसा लुक!’

सैंडविच से चीज़ हटवाने पर मांगे 75 सेंट, सैन फ्रांसिस्को कैफे का वीडियो वायरल

राजीव ठाकुर के पिता का निधन, कृष्णा अभिषेक ने दी दुखद खबर

Recommended Stories

लाल किले पर साइकिल तिरंगा यात्रा का समापन, 125 साइकिल सवारों ने लिया हिस्सा

काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी, विश्व शांति के लिए की प्रार्थना

करण जौहर का अतरंगी लुक वायरल, यूजर्स बोले- ‘कौवे जैसा लुक!’

सैंडविच से चीज़ हटवाने पर मांगे 75 सेंट, सैन फ्रांसिस्को कैफे का वीडियो वायरल

राजीव ठाकुर के पिता का निधन, कृष्णा अभिषेक ने दी दुखद खबर