डोनाल्ड ट्रंप के कड़े बयान के बाद अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ गया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए हैं, जिससे मध्य पूर्व में क्षेत्रीय अस्थिरता और वैश्विक तेल बाजार को लेकर चिंताएं गहरा गई हैं।
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर कड़े बयान के बाद तेहरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम समाप्त होने की बात कहते हुए उसे “कैंसर” बताया, जबकि ईरान ने साफ कर दिया कि वह किसी भी सैन्य चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
ट्रंप ने ईरान पर साधा निशाना
कुछ सप्ताह पहले तक अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाने वाले ट्रंप इस बार काफी आक्रामक दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि हालिया हमलों के बाद ईरान के साथ युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान “गंदा खेल” खेल रहा है और उस पर भरोसा करना मुश्किल है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और अमेरिकी वार्ताकार संवाद जारी रख सकते हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि ईरान केवल समय बर्बाद कर रहा है।
ईरान का जवाब- किसी भी लड़ाई के लिए तैयार
ट्रंप के बयान के बाद ईरान ने भी कड़ा जवाब दिया। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा एवं विदेश नीति समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने कहा कि ईरान किसी भी दबाव या धमकी से डरने वाला नहीं है।
उन्होंने कहा कि देश हर तरह की बुराई और सैन्य चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
दोनों पक्षों ने किए सैन्य कार्रवाई के दावे
तनाव के बीच अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया कि 8 जुलाई को ईरान के 80 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
वहीं ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिका के 85 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरानी सेना के अनुसार, दक्षिणी ईरान पर अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन स्थित शेख ईसा एयर बेस पर तैनात अमेरिकी बलों पर ड्रोन हमला भी किया गया।
‘धमकियों का दौर खत्म हो चुका’
ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने भी अमेरिका पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने समझौते के बावजूद ईरान पर हमले कर अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में उन्होंने कहा, “धमकी और जबरन दबाव का दौर अब खत्म हो चुका है। ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।”
उन्होंने अमेरिका पर कई आरोप लगाते हुए कहा कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े नियमों की अनदेखी की, तेल प्रतिबंधों को दोबारा लागू किया, दक्षिणी ईरान पर हमले किए और क्षेत्रीय तनाव को बढ़ावा दिया।
बढ़ सकती है क्षेत्रीय अस्थिरता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव से पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है। यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हुई है।

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