निज्जर हत्याकांड की जांच में नया मोड़ आया है। अमेरिकी आरोप-पत्र और RCMP के ताजा बयान में भारत सरकार की संलिप्तता के सबूत नहीं मिलने की बात सामने आई है, जबकि जांच का फोकस अब कथित संगठित अपराध नेटवर्क पर केंद्रित है।
खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में नया मोड़ सामने आया है। अमेरिका की ओर से दाखिल आरोप-पत्र में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी गोल्डी बराड़ पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। इस बीच कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) की एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि जांच में भारत सरकार या भारतीय अधिकारियों की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला।
अमेरिकी आरोप-पत्र में क्या कहा गया?
अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई ने भारत की जेल में रहते हुए कथित तौर पर हत्या की साजिश से जुड़े निर्देश दिए, जबकि उसके सहयोगी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ ने उत्तरी अमेरिका में इसकी गतिविधियों की निगरानी की, हालांकि, आरोप-पत्र में कहीं भी यह नहीं कहा गया कि भारत सरकार या उसके किसी अधिकारी की इस हत्या में भूमिका थी।
RCMP ने क्या कहा?
कनाडाई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, RCMP की उप आयुक्त लिसा मोरलैंड ने एक इंटरव्यू में कहा कि जांच के दौरान भारतीय अधिकारियों की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने जांच में सहयोग किया। इसी तरह अमेरिकी अधिकारियों ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भारत सरकार की किसी भूमिका का आरोप नहीं लगाया।
ट्रूडो ने लगाए थे गंभीर आरोप
सितंबर 2023 में तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में कहा था कि कनाडा के पास ऐसे “विश्वसनीय आरोप” हैं, जो निज्जर की हत्या को भारतीय सरकारी एजेंटों से जोड़ते हैं। भारत ने उस समय इन आरोपों को “बेतुका और निराधार” बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया था। इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में भारी तनाव आ गया था। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया और कई द्विपक्षीय वार्ताएं रोक दी गई थीं।

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हत्या कैसे हुई थी?
खालिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की 18 जून 2023 को कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे शहर में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। भारत ने इससे पहले निज्जर को आतंकवादी घोषित किया था और उस पर कई हिंसक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगाए थे अमेरिकी अभियोग और कनाडाई पुलिस के ताजा बयान के बाद जांच का फोकस अब एक अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क पर दिखाई दे रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में भी कहा गया है कि उपलब्ध दस्तावेजों में भारत सरकार की कथित भूमिका का उल्लेख नहीं है।
भारत-कनाडा संबंधों में सुधार के संकेत
कनाडा में राजनीतिक बदलाव के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की कोशिशें तेज हुई हैं। मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और कनाडा ने संबंध सामान्य बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। दोनों देशों ने अपने-अपने उच्चायुक्तों की नियुक्ति बहाल की है, वीजा सेवाएं दोबारा शुरू हुई हैं और व्यापार, ऊर्जा, पर्यावरण तथा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में वार्ता फिर से शुरू की गई है। साथ ही सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को भी बढ़ाया गया है।
