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क्या इस्तीफे के बाद भी ट्रस्ट में हैं चंपत राय और अनिल मिश्रा? कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने किया बड़ा खुलासा

चंपत राय और अनिल मिश्रा

राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने स्पष्ट किया है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार होने के साथ ही उनकी ट्रस्ट सदस्यता भी समाप्त हो गई है, जबकि चढ़ावा चोरी मामले की जांच अभी जारी है।

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए बदलावों को लेकर चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है. ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने स्पष्ट किया है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा केवल उनके पदों से नहीं, बल्कि ट्रस्ट की सदस्यता से भी स्वीकार किया गया है. यानी अब दोनों का श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से किसी भी तरह का संबंध नहीं है. गोविंद देव गिरि ने कहा कि कुछ लोगों के बीच यह भ्रम था कि दोनों नेताओं को केवल उनके दायित्वों से मुक्त किया गया है, जबकि वे ट्रस्ट के सदस्य बने हुए हैं. उन्होंने साफ किया कि इस्तीफा स्वीकार होने के साथ ही उनकी सदस्यता भी समाप्त हो गई है.

ट्रस्ट की बैठक में हुए अहम फैसले

सोमवार को अयोध्या में राम मंदिर परिसर में ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी. बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों को मंजूरी दी गई। इसके अलावा मंदिर के वित्तीय लेन-देन, वर्ष 2025-26 की ऑडिट रिपोर्ट और चढ़ावा चोरी मामले पर भी विस्तार से चर्चा की गई. ट्रस्ट ने भविष्य में वित्तीय व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने के लिए कई अहम निर्णय भी लिए.

अपनी भूमिका पर क्या बोले गोविंद देव गिरि?

चढ़ावा चोरी मामले में गोविंद देव गिरि की जिम्मेदारियों को लेकर भी सवाल उठे थे. इस पर उन्होंने कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल मंदिर के कोष में जमा और खर्च होने वाले धन तक सीमित थी. उन्होंने कहा कि जो राशि बैंक खाते में जमा ही नहीं हुई, उसकी निगरानी और गणना की जिम्मेदारी ट्रस्ट के संबंधित पदाधिकारियों की थी. उन्होंने यह भी बताया कि वह पुणे में रहते हैं और मंदिर में रोजाना होने वाले वित्तीय लेन-देन में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका नहीं रहती. इसी कारण बैंक खातों में उनके हस्ताक्षर भी अधिकृत नहीं थे.

चंपत राय का किया बचाव

गोविंद देव गिरि ने बातचीत के दौरान चंपत राय का बचाव भी किया. उन्होंने कहा कि चंपत राय ने जिन लोगों पर भरोसा किया, उन्हीं लोगों ने उनके विश्वास को तोड़ा. उनके अनुसार, चंपत राय की सबसे बड़ी गलती यही थी कि उन्होंने गलत लोगों पर भरोसा किया. हालांकि, जब उनसे उनके इस्तीफे और व्यक्तिगत जिम्मेदारी को लेकर सवाल पूछा गया, तो वे नाराज हो गए। बातचीत के दौरान उन्होंने रिपोर्टर का माइक हटाने की भी कोशिश की, जिसका वीडियो भी चर्चा का विषय बना।

चढ़ावा चोरी मामले की जांच जारी

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अभी जारी है। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए वित्तीय और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

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